8th Pay Commission, Minimum Pension Hike, OPS Option and Age-Based Benefits Among Key Demands
8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले देशभर में कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और विभिन्न हितधारकों से सुझाव जुटा रहा है। आयोग ने सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 जून और आवश्यक आंकड़े जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की थी। अब आयोग प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर रहा है और इसकी अंतिम रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की संभावना है।
आयोग की सिफारिशों का लाभ करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों, जिनमें रक्षा क्षेत्र के कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मी भी शामिल हैं, को मिल सकता है।
आयोग का नेतृत्व कौन कर रहा है?
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष, जो प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी हैं, आयोग के सदस्य हैं।

आयोग के कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) में 31 दिसंबर 2025 तक सेवानिवृत्त हुए पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों की पेंशन की समीक्षा भी शामिल है।
पेंशन को लेकर प्रमुख मांगें
कर्मचारी संगठनों जैसे नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने आयोग को विस्तृत सुझाव सौंपे हैं।
इन संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- संशोधित वेतनमान के अनुरूप पेंशन का पुनर्गठन।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली तथा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में सुधार।
- संशोधित वेतन संरचना के अनुरूप पेंशन में समानता।
- अन्य महत्वपूर्ण मांगें
कई अन्य कर्मचारी संगठनों और हितधारकों ने भी पेंशन व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग की है। इनमें शामिल हैं—
- न्यूनतम पेंशन को अंतिम प्राप्त वेतन (Last Pay Drawn) या अंतिम 10 महीनों के औसत वेतन का 67 प्रतिशत किया जाए।
- पेंशन की गणना में उपयोग होने वाले फिटमेंट फैक्टर की समीक्षा और संशोधन।
- महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) की व्यवस्था में बदलाव और इसे पेंशन में बेहतर तरीके से शामिल किया जाए।
- पारिवारिक पेंशन के दायरे का विस्तार।
- ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाई जाए और पेंशन कम्यूटेशन के नियमों में संशोधन किया जाए।
- कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों को OPS, NPS या UPS में अपनी आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुनने की अनुमति मिले।
- अधिक आयु वाले पेंशनभोगियों के लिए आयु आधारित अतिरिक्त पेंशन लागू की जाए।
- आयु के आधार पर प्रस्तावित पेंशन
यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो पेंशनभोगियों को उम्र के अनुसार अंतिम वेतन के आधार पर निम्न स्तर की पेंशन मिल सकती है—
पेंशनभोगी की आयु प्रस्तावित पेंशन
- 65 वर्ष अंतिम वेतन का 70%
- 70 वर्ष अंतिम वेतन का 75%
- 75 वर्ष अंतिम वेतन का 80%
- 80 वर्ष अंतिम वेतन का 85%
- 85 वर्ष अंतिम वेतन का 90%
- 90 वर्ष या उससे अधिक अंतिम वेतन का 100%
अभी अंतिम फैसला नहीं
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी सुझाव और मांगें हैं। 8वें वेतन आयोग ने अभी तक अपनी अंतिम सिफारिशें जारी नहीं की हैं। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भी इन्हें लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।
राज्यों में जारी हैं बैठकें
आयोग अप्रैल, मई और जून के दौरान विभिन्न राज्यों में कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ बैठकें कर चुका है। जुलाई में भी कई बैठकें प्रस्तावित हैं और आने वाले महीनों में अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में भी हितधारकों से चर्चा जारी रहेगी।
निष्कर्ष
8वां वेतन आयोग केवल कर्मचारियों के वेतन संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों पेंशनभोगियों के लिए भी अहम साबित हो सकता है। यदि कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें स्वीकार होती हैं तो न्यूनतम पेंशन, पारिवारिक पेंशन, महंगाई राहत और आयु आधारित अतिरिक्त पेंशन जैसी व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।
Source: https://www.livemint.com
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