Indian Govt Scheme – Sarkari Yojna

Information about latest Indian Government Schemes provided by Modi Government. Various Scheme by Niti Ayog i.e. Pradhan Mantri Awas Yojna, Ujjwala Yojna etc.

ऑनलाइन बीमा खरीदना सस्ता पर फर्जी ऑफर्स से सावधान रहें ,इन बातों का रखें ख्याल

ऑनलाइन बीमा खरीदना सस्ता पर इन बातों का रखें ख्याल Buy insurance online but keep these things in mind
Buy+insurance+online
कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते बीमा पॉलिसी की ऑनलाइन खरीदारी बढ़ी है। इस दौरान लोग अपनी जरूरत के हिसाब से कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी या जीवन बीमा ले रहे हैं। कई लोग नए ऑफर्स के साथ नई पॉलिसी भी ले रहे हैं। इसका फायदा उठाकर साइबर ठग कम प्रीमियम का झांसा देकर लोगों को फंसा रहे हैं। इससे बचने के लिए बीमा नियामक इरडा ने बीमा लेने वालों को फर्जी ऑफर से सावधान रहने को भी कहा। 
फर्जी ऑफर्स से सावधान रहें : बीमा नियामक इरडा ने आवेदकों को इंश्योरेंस के फर्जी ऑनलाइन ऑफर से बचने के लिए कहा है। लोगों में कोरोना महामारी के डर से हेल्थ इंश्योरेंस की ज्यादा डिमांड कर रहे हैं। ऐसे में इरडा की ओर से कहा गया है कि बाजार में कई फेक डिजिटल माध्यम से बहुत कम प्रीमियम पर पॉलिसी देने का झांसा दे रहे हैं। जिससे देश के लोगों को बचने की काफी जरूरत है।
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नियामक ने शुरू की जानकारी देने की सुविधा: बीमा नियामक इरडा ने बीमा खरीदने वाले को सही जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। आप इरडा की बेवसाइट के जरिये बीमा खरीदने से पहले आसानी से सही जानकारी पा सकते हैं।
  • ऑनलाइन बीमा खरीदने में व्यक्तिगत जानकारी देने समय सावधानी बरतें।
  • दो-तीन कंपनियों की पॉलिसी को पहले ऑनलाइन जांचें, पढ़ें और फिर सही पॉलिसी खरीदें।
  • अपनी जरूरत को जाने बगैर किसी भी ऑनलाइन पॉलिसी को किसी एजेंट के दबाव में आकर न खरीदें।
  • ऑनलाइन बीमा खरीदने से पहले हमेशा कंपनी की शर्तों को पढ़ें, उसके बाद ही भुगतान करें।
  • व्यक्तिगत पहचान की जानकारी प्रामाणिक वेबसाइट पर ही दें। अपने फोन, लैपटॉप या डेस्कटॉप में सिक्योरिटी सॉफ्टवेअर जरूर इंस्टॉल करें।
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बीमा कंपनी ऑनलाइन बीमा खरीदारों को रियायत देती है क्योंकि इसमें एजेंट से लेकर कागजी खर्च बचता है। आप ऑनलाइन पॉलिसी खरीदकर हेल्थ इंश्योरेंस, जीवन बीमा या टर्म इंश्योंरेंस पर अच्छी रकम बचत कर सकते हैं। 
Source :https://www.livehindustan.com

नोट :- हमारे वेबसाइट www.indiangovtscheme.com पर ऐसी जानकारी रोजाना आती रहती है, तो आप ऐसी ही सरकारी योजनाओं की जानकारी पाने के लिए हमारे वेबसाइट www.indiangovtscheme.com से जुड़े रहे
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Kejriwal government order, private schools will not increase fees, will not demand fees for three months केजरीवाल सरकार का आदेश, प्राइवेट स्कूल नहीं बढ़ाएंगे फीस, तीन महीने की फीस डिमांड नहीं करेगा

केजरीवाल सरकार का आदेश, प्राइवेट स्कूल नहीं बढ़ाएंगे फीस, तीन महीने की फीस डिमांड नहीं करेगा
delhi+goverment
दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है। डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि पिछले काफी दिनों से लोग शिकायत कर रहे थे कि प्राइवेट स्कूल का प्रशासन माता-पिता को तंग कर रहे हैं। कहीं फीस के दबाव बनाते हैं तो कहीं बच्चे का नाम काटने की धमकी भी देते हैं।
नई दिल्ली
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि सूबे में कोई भी प्राइवेट स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता। कोरोना वायरस संकट के बीच कुछ स्कूलों की तरफ से फीस बढ़ाने की शिकायतें आने पर सरकार ने आदेश दिया है कि जब तक स्कूल नहीं खुलते हैं, तब तक कोई भी स्कूल ट्यूशन फी के अलावा कुछ भी चार्ज नहीं कर सकता। स्कूल 3 महीने की फीस भी एक साथ नहीं ले सकते। उन्हें एक-एक महीने करके फीस लेनी होगी और वह भी ट्यूशन फीस।
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कोई भी प्राइवेट स्कूल सरकार से इजाजत लिए बगैर फीस नहीं बढ़ा सकता। दिल्ली के डेप्युटी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को कहा, ‘हमें इस तरह की कई शिकायतें मिली हैं कि स्कूल फीस बढ़ा रहे हैं और ट्रांसपोर्ट फी जैसे ऐसे चार्ज भी लगा रहे हैं, जिनका लॉकडाउन के दौरान कोई उपयोग तक नहीं हो रहा है।’
सिसोदिया ने कहा कि कई जगह शिकायत मिली है कि कुछ स्कूल बढ़ा चढ़ाकर फीस चार्ज कर रहे हैं। कुछ ने फीस बढ़ा दी है। कुछ एनुअल चार्ज ले रहे हैं, ट्रांसपोर्टेशन फीस ले रहे हैं। कुछ पूरे तिमाही की फीस मांग रहे हैं। कुछ बच्चों ने फीस नहीं दी है, तो ऑनलाइन क्लास बंद कर दी है। स्कूलों को ऐसा नहीं करना चाहिए। इस सारी शिकायतों के बाद सरकार ने आदेश जारी किया है कि किसी भी प्राइवेट स्कूल को फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
केजरीवाल सरकार का आदेश
1- कोई भी स्कूल तीन महीने की फीस डिमांड नहीं करेगा। केवल ट्यूशन फीस लेगा, वो भी महीनेवार।
2- जो ऑनलाइन एजेकुशन दी जा रही है, वह सभी बच्चों को देनी होगी। जो माता-पिता फीस नहीं दे पा रहे हैं तो उनके बच्चों के नाम ऑनलाइन क्लास से नहीं हटाए जाएंगे।
3- कोई भी स्कूल ट्रांसपोर्टेशन फीस चार्ज नहीं करेगा।

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4- एक महीने की ट्यूशन फीस के अलावा कोई भी स्कूल सरकारी या फिर प्राइवेट, किसी भी पैरंट से कोई और तरह की फीस चार्ज नहीं करेगा।
5- सभी प्राइवेट स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने सभी स्टाफ को समय पर सैलरी उपलब्ध कराएंगे। अगर रेवेन्यू की दिक्कत है, तो पैरंट संस्था से लेंगे लेकिन किसी की सैलरी नहीं रोकेंगे। चाहे वह कान्ट्रैक्ट पर ही क्यों न हो।
दिल्ली में कोराना वायरस तेजी से फैला लेकिन केजरीवाल सरकार के ‘ऑपरेशन शील्ड’ के बाद पॉजिटिव मामलों में कमी दर्ज की गई। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि अब तक 1640 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं और 38 लोगों की मौत हो चुकी है।
Source :https://navbharattimes.indiatimes.com

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नीति आयोग की स्‍वास्‍थ्‍य नीति

नीति आयोग ने गैर संचारी रोगों के उपचार के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी के लिए दिशा-निर्देश और आदर्श छूटग्राही अनुबंध का मॉडल जारी किया 
     सार्वजनिक निजी भागीदारी वाली इकाइयां जिला अस्‍पतालों में खोली जाएंगी इनमें हृदय रोग, कैंसर और फेफड़ों की बीमा‍री से बचाव और उपचार की व्‍यवस्‍था होगी
नीति+आयोग

     नीति आयोग ने आज गैर-संचारी रोगों के उपचार के लिए सार्वजनिक और निजी भागीदारी (पीपीपी) के लिए दिशा-निर्देशों के साथ ही आदर्श छूटग्राही अनुबंध का मॉडल भी जारी कर दिया। इसके जरिए दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में जिला अस्‍पतालों में गैर-संचारी रोगों (हृदय रोग, कैंसर और फेफड़ों) से संबंधित बीमारियों की रोकथाम और उपचार की पूरक व्‍यवस्‍था की गई है।

     नीति आयोग ने स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय, राज्‍य सरकारों और स्‍वास्‍थ्‍य सेवा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इसे तैयार किया है। दिशा-निर्देश और आदर्श छूटग्राही अनुबंध जारी किए जाने के अवसर पर नीति आयोग के सदस्‍य डॉ.वी के पॉल तथा साझेदार एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 
प्रमुख विशेषताएं: 
  • गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए सार्वजनिक निजी भागादारी इकाइयां जिला अस्‍पतालों में खोली जाएंगी।
  • आदर्श छूटग्राही अनुबंध मॉडल के तहत तीन गैर-संचारी रोगों – हृदय रोग, कैंसर और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों की रोकथाम और उपचार को शामिल किया गया है।
 सेवाओं का विस्‍तार
  •  कैंसर विज्ञान: प्रभाव घटाना तथा कीमोथैरेपी और हारमोन थैरेपी के जरिए इलाज करना।
  • श्‍वसन रोग विज्ञान: रोग के अत्‍याधिक प्रभाव को घटाने के लिए दवाईयों के जरिए आपात चिकित्‍सा प्रबंधन। 
  • हृदय रोग विज्ञान: रोग के अत्‍याधिक प्रभाव को घटाने के लिए एनजियोंग्राफी-एनजियोप्‍लासटी और दवाईयों के जरिए आपात चिकित्‍सा प्रबंधन। .
  • सार्वजनिक जन भागीदारी के तहत ये सेवाएं एकल साझेदार या निजी साझेदारों के एकल समूह द्वारा उपलब्‍ध कराई जाएगी।
  • निजी भागीदारों को इन इकाइयों में उपलब्‍ध कराई जाने वाली सेवाओं के उन्‍नयन और उनके संचालन प्रबंधन के लिए निवेश करना होगा
  • सरकार द्वारा जमीन और अन्‍य ढांचागत सुविधाएं ‘जहां हैं जैसी हैं के’ के आधार पर उपलब्‍ध कराएंगी। इसके अलावा वह अस्‍पतालों में सभी तरह की सुविधाओं के लिए भी मदद देगी। 
  • रोगियों से सेवांओं के लिए ली जाने वाली शुल्‍क की दरें राज्‍यों और केंद्रों सरकारों द्वारा तय बीमा योजनाओं के आधार पर वसूली जाएंगी। जिन राज्‍यों में ऐसे बीमा पैकेज नहीं होंगे वहां लाभार्थी सीजीएचएस पैकेज की सुविधा ले सकेंगे। 
  •  कम पड़ने वाली राशि की व्‍यवस्‍था सरकारों द्वारा की जाएगी।.
पृष्‍ठभूमि

     नीति आयोग ने देश पर बीमारियों के बोझ में गैर-संचारी रोगों का प्रतिशत पिछले कुछ वर्षों से बढ़ने के कारण ये दिशा-निर्देंश जारी किए हैं। पिछले कुछ समय से देश के जिला अस्‍पतालों में सारा ध्‍यान संक्रामक रोगों, प्रजनन तथा बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल पर ही केंद्रित किया जाता रहा। जिसकी वजह से गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए सक्षम प्रणाली विकसित नहीं हो पाई। 

     आयुष्‍मान भारत के तहत बनाए गए आरोग्‍य केंद्रों में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और उपचार की व्‍यवस्‍था की गई है। ऐसी व्‍यवस्‍था होने के बावजूद इन केंद्रों में ऐसे मामले आ सकते हैं, जिसमें रोगियों का उपचार अस्‍पताल में करना जरूरी हो सकता है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक निजी भागीदारी से बनाए वाले जिला अस्‍पताल बड़ी भूमिका निभाएंगे। 

     ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के शहरी क्षेत्रों में ज्‍यादा मौजूद होने के कारण ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों को इलाज के लिए काफी लंबा सफर तय करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक और निजी भागीदारी से बनाए जाने वाले जिला अस्‍पताल स्‍वास्‍थ्‍य सेवा उपलब्‍ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। 

     नीति आयोग द्वारा आज पीपीपी के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश और आदर्श छूटग्राही अनुबंध मॉडल जन स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की चिंताजनक कमियों की भरपाई करने में मददगार साबित होंगे और राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति 2017 के लक्ष्‍यों की प्राप्ति में सहायक बनेंगे। इससे उन क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ेगा जो क्षेत्र अभी तक इससे वंचित रहे हैं।
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