Indian Govt Scheme – Sarkari Yojna

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Chief Minister Jan Van Yojana – Jharkhand मुख्यमंत्री जन वन योजना – झारखण्ड

Chief Minister Jan Van Yojana – Jharkhand मुख्यमंत्री जन वन योजना – झारखण्ड 
इस योजना से सम्बंधित कुछ मुख्य बिंदु 
  • भूमिका
  • योजना के उद्देश्य
  • योजना के घटक
  • लाभुकों को देय प्रोत्साहन राशि
  • उपरोक्त व्यय के आँकड़ों के आधार पर
  • प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने हेतु आवेदन की प्रक्रिया
  • चयन की प्रक्रिया
  • लाभुको को की जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान की प्रक्रिया
  • विभागीय पदाधिकारियों/ कर्मचारियो के कर्त्तव्य एवं दायित्व
  • योजना में लगाये गये वृक्षों का स्वामित्व
भूमिका
झारखण्ड राज्य में पर्यावरण संतुलन बनाये रखने हेतु वन आच्छादित क्षेत्र को बढाया जाना आवश्यक है। राज्य में वन आच्छादित क्षेत्र को बढाने हेतु निजी भूमि पर वृक्षारोपण को बढावा देकर किसानो की आय के साधन में वृद्धि के साथ-साथ राज्य के अधिसूचित वनों पर दबाव को कम किया जा सकता है। इन उद्देश्यो की पूर्ति हेतु राज्य मे मुख्यमंत्री जन वन योजना लागु करने का प्रस्ताव है।

Jan+Van+Yojana
इस योजना के अंतर्गत राजस्व अभिलेखो के अनुसार उचित स्वामित्व रखने वाले व्यक्ति को उनके द्वारा स्वेच्छा से विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एंव प्रजातियों का अपनी निजी भूमि पर (ब्लॉक वृक्षरोपण अथवा खेत की मेड़ पर रेखिक वनरोपण) वृक्षारोपण किया जायेगा। प्रोत्साहन-स्वरुप वृक्षारोपण एवं उसके रख-रखाव पर हुए व्यय के 50 प्रतिशत अंश की प्रतिपूर्ति विभाग द्वारा की जायेगी।
योजना के उद्देश्य
योजना के निम्नलिखित उद्देश्य है
  • प्रदेश के हरित क्षेत्र में वृद्धि कर पर्यावरण संतुलन कायम रखना।
  • वृक्षारोपण के माध्यम से भू-जल संरक्षण करना।
  • निजी क्षेत्र में वनोपज उत्पादन उत्पादन करे बढ़ावा देकर अधिसूचित वनों पर दबाव कम करना।
  • किसानों की भूमि पर वृक्षारोपण कर उनकी आय बढ़ाना।
  • राज्य में जन सहयोग से वनाच्छादन को बढ़ाना।
योजना के घटक
योजना के घटक निम्नलिखित उद्देश्य है-
  • इस योजना के अन्तर्गत ब्लॉक वृक्षरोपण (ब्लॉक प्लांटेशन) एवं खेत की मेड पर वृक्षारोपण (रैखिक) किया जा सकेगा।
कार्य विवरणी
  • योजना का कार्यान्वयन तीन वर्षो मे सम्पन्न होगा, जिसमे वर्षवार लाभुक द्वारा वृक्षरोपण संबंधी निम्न कार्य अपने खर्चे पर संपादित किय जायेगे
प्रथम वर्ष
  • गढढा खुदाई, सुरक्षा घेरना बनाना, पौधा रोपण, दो कोडनी निकौनी, उर्वरक / जैविक खाद / कीटनाशक देना, पटवन एवं सुरक्षा आदि।
द्वितीय वर्ष
  • एक कोडनी निकौनी (फलदार प्रजाति के पौधों के लिए दो कोड़नी निकौनी), उर्वरक, पटवन कार्य एवं सुरक्षा कार्य।
तृतीय वर्ष
  • एक कोड़नी निकौनी (फलदार प्रजाति के पौधों के लिए दो कोड़नी निकौनी), उर्वरक, पटवन कार्य एवं सुरक्षा कार्य।
दो पौधों के बीच दूरी
निजी भूमि पर काष्ठ प्रजाति के रोपण हेतु 30cm x 30cm साईज के गढढे खोदे जायेगे तथा दो गढढ़ो के बीच 3m x 3m तथा मेंढ पर 2m x 2m दो पौधों के बीच की दूरी रखी जायेगी। फलदार पौधे के लिए 60cm x 60cm साईज के गढढे खोदे जायेगे एवं 5m x 5m दो पौधों के बीच की दूरी रखी जायेगी। एक एकड़ मे काष्ठ प्रजाति के 455 पौधों फलदार प्रजाति दो 160 पौधों का रोपण किया जा सकेगा। मेढ पर काष्ठ प्रजाति के 445 पौधों लगाने पर इसे एक एकड़ के समतुल्य माना जायेगा। मेढ पर फलदार पौधों नही लगाये जायेगें।
वृक्षारोपण हेतु निर्धारित प्रजातियाँ
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण, अपनी निजी भूमि पर काष्ठ प्रजातियो यथा शीशम, सागवान, गम्हार, क्लोनल, यूकलिप्टस, एकासिया एवं फलदार प्रजातियों यथा कलमी आम, कटहल, अमरूद, आंवला, बेल एवं लीची का वनरोपन कर सकेगे। कालान्तर मे यदि इन प्रजातियो से अतिरिकत अन्य प्रजातियों का वृक्षारोपण किया जाना आवश्यक महसूस किया जाता है, तो प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखण्ड, राँची की अनुमति से अन्य प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जा सकेगा।
वृक्षारोपण हेतु पौधों की उपलब्धता विभागीय पौधशाला एवं उसमे उपलब्ध पौधों की पूर्ण सूची विभागीय वेबसाईट वन विभाग , झारखण्ड सरकार पर उपलब्ध कराई जायेगी। लाभुको को विभागीय पौधशाला में उपलब्ध पौधों की आपूर्ति की जा सकेगी अथवा लाभुक पौधों की आपूर्ति अन्य श्रोतो से भी कर सकेगे। फलदार पौधों एवं कलमी फलदार पौधों भारत सरकार के संस्थान हार्प पलांडू, राज्य सरकार की पौधशालाओें से सरकार/संस्थान द्वारा निर्धारित विक्रय दर पर भी क्रय किये जा सकते है।
वृक्षारोपण किये गये पौधों का सुरक्षा का दायित्व लाभुक का होगा।
  • इस योजना के तहत वृक्षारोपण की न्यूनतम सीमा एक लाभुक के लिये एक एकड़ एंव अधिकम सीमा 50 एकड़ होगी।
लाभुकों को देय प्रोत्साहन राशि
  • इस योजना हेतु स्वीकृत वनरोपण दर के अनुरूप लागत राशि का 50 प्रतिशत अंश लाभुक को प्रोत्साहन राशि के रूप में देय होगा।
विभाग द्वारा निर्धारित वृक्षारोपण दर को अनुमान्य प्रति एकड़ फलदार एवं काष्ठ प्रजाति के पौंधों के रोपण हेतु निम्न व्यय होगा

क्रमांकवृक्षारोपणवर्षवार प्रस्तावित व्यय (राशि रू. में)
प्रथम वर्षद्वितीय वर्षतृतीय वर्षकुल
1फलदार प्रजाति22595.003149.003618.0029363.00
2काष्ट प्रजाति18264.005925.006487.0030695.00
उपरोक्त व्यय के आँकड़ों के आधार पर
अगर पौधों की आपूर्ती वन विभाग द्वारा की जायेगी तो इस योजना के अधीन लाभुक को निम्न्वत प्रोत्साहन राशि देय होगी
योजना वर्षप्रति पौधों देय प्रोत्साहन राशि (रू. में)
प्रथम वर्षकाष्ठ प्रजातिफलदार प्रजाति
द्वितीय वर्ष11.0046.00
तृतीय वर्ष7.0010.00
कुल राशि7.0011.00
अगर लाभुक द्वारा स्वयं पौधों की व्यवस्था की जाती है तो लाभुक को निन्नवत् प्रोत्साहन राशि देय होगी

योजना वर्षप्रति पौधों देय प्रोत्साहन राशि (रू. में)
काष्ठ प्रजातिफलदार प्रजाति
प्रथम वर्ष21.0071.00
द्वितीय वर्ष7.0010.00
तृतीय वर्ष7.0011.00
कुल राशि35.0092.00
विभाग द्वारा इस योजना हेतु वनरोपण दर का निर्धारण प्रति वर्ष किया जाएगा एवं तद्नुसार लाभुक को देय प्रोत्साहन राशि का निर्धारण होगा।
प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने हेतु आवेदन की प्रक्रिया
  • विभाग द्वारा समाचार पत्रों में केन्द्रीयकृत विज्ञापन प्रकाशित कराकर इस योजना के अन्तर्गत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने हेतु लाभान्वितो से विहित प्रपत्र (अनुलग्नक-1) में आवेदन आमंत्रित किये जायेगें। लाभुक को आवेदन पत्र के साथ निम्न कागजात संलग्न करना आवश्यक होगा
  • भूमि स्वामित्व एवं कब्ज के संबंध में अचंलाधिकारी का प्रतिवेदन (अनुलग्नक-2)
  • अनुबंध पत्र (अनुलग्नक-3)लाभुक के बैंक पासबुक की अद्यतन छायाप्रति जिसमें प्रोत्साहन राशि प्राप्त की जानी है।
  • इच्छुक व्यक्ति विहित प्रपत्र (अनुलग्नक सं.-1) में अपने जिले के वन प्रमण्डल पदाधिकारी (अनुलग्नक-4 में उल्लेखित) के कार्यालय में समाचार पत्रों में इस योजना हेतु विज्ञापन प्रकाशन के उपरांत निर्धारित समयसीमा में आवेदन कर सकेगा। विज्ञापन प्रति वर्ष सितम्बर माह में स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाएगा।
  • एक से अधिक व्यक्ति मिलकर भी इस योजना के अन्तर्गत मेढ़ के किनारे (रैखिक वृक्षारोपण) कार्य कर सकते है।
  • आवेदन प्राप्ति के तीन दिनों के अंतर्गत वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा विभागीय एमआईएस आवेदन  पर अपलोड किया जाएगा। अपूर्ण आवेदन प्राप्त होने पर आवेदन अस्वीकार करते हुए सूचना आवेदक को दी जाएगी।
चयन की प्रक्रिया
  •  संबंधित वन प्रमण्डल पदाधिकरी कंडिका 5.1 में उल्लेखित कागजातों की जाँच करेगे एवं लाभुकों का चयन कर सूची बनायेगें।
  • उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जायेगी जो 1 एकड से अधिक भूमि में ब्लॉक वृक्षारोपण के इच्छुक होंगें।
  • विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर आवेदको उपस्थित मे लॉटरी निकाल कर लाभुको का चयन किया जायेगा।
  • चयनित लाभुको की सूची विभागीय वेबसाईट पर अपलोड की जाएगी तथा संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा लाभुक को सूचित किया जायेगा।
  • संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रमंडलवार चयनित लाभुको की सूची संबंधित अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं निदेशक, प्रसार वानिकी / मुख्य वन संरक्षक विश्व खाद्य कार्यक्रम को वृक्षारोपण हेतु पौधो की व्यवस्था करने हेतु प्रेषित की जायेगी।
  • विभाग द्वारा इस योजना  को लाभुको को पूर्ण विवरणी जिसमें वृक्षारोपण स्थल के जियो कोरडिनेट तथा फोटोग्राफ भी शामिल होगे, जिलावार संधारित की जायेगी।
लाभुको को की जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान की प्रक्रिया
  •  लाभुकों द्वारा निजी भूमि पर किये गये वृक्षारोपण के लिये प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने हेतु अनुलग्नक सं0-4 में वर्णित पदाधिकारी के कार्यालय में उत्तरजीविता के आधार पर दावा माह नवम्बर में किया जायेगा। दावा (प्रपत्र अनुलग्नक-5 (क) एंव 5(ख)
  • वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा लाभुक के उत्तरजीविता के दावे का माह दिसम्बर में सत्यापन करके भुगतान की स्वीकृति प्रदान की जाएगी एवं जनवरी माह में उत्तरजीविता के आधार पर प्रोत्साहन राशि का भुगतान लाभुक के बैंक खाते में सीधे हस्तान्तरिक किया जायेगा।
  • यदि प्रथम से द्वितीय वर्ष की किस्त के रूप् मे द्वितीय पक्ष को अतिरेक राशि का भुगतान हो गया होगा तो अंतिम किस्त की राशि भुगतान करते समय पूर्व में भुगतेय ऐसी राशि का समायोजन करने के पश्चात् ही अंतिम भुगतान किया जायेगा।
विभागीय पदाधिकारियों/ कर्मचारियो के कर्त्तव्य एवं दायित्व
  • वन विभाग के संबंधित पदाधिकारियो/ कर्मचारियों का दायित्व इच्छुक व्यक्तियो से आवेदन पत्र प्राप्त करना, लाभुकों का चयन करना, मांगे जने पर पौधे उपलब्ध कराना, आवश्यक तकनीकि जानकारी प्रदान करना, प्रोत्साहन राशि के दावों के सत्यापन पश्चात् नियमानुसार देय प्रोत्साहन राशि का भुगतान करना तथा योजना की सफलता हेतु उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करने तक सीमित होगा।
  • प्रत्येक वर्ष इस योजना के अन्तर्गत लाभुक, व्यक्तियों की विवरणी (अनुलग्नक-6) विभागीय वेबसाइट पर अपलोड की जायेगी।
योजना में लगाये गये वृक्षों का स्वामित्व
  • “जन-वन योजना ” के तहत उगाये गये वृक्षो का पूर्ण स्वामित्व संबंधित लाभुक मे निहित होगा। वृक्षो के पातन के समय संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा के अन्दर पातन की अनुमति एवं परिवहन अनुज्ञा पत्र निर्गत किया जायेगा। इस कार्य हेतु विभाग इस योजना में किये गये वृक्षारोपण का डाटाबेस तैयार कर संधारित करेगा।
योजना का प्रपत्र तथा अनुलग्नकों की जानकारी हेतु विभाग के इस लिंक पर जाने के लिए क्लिक करें  जन वन योजना में रजिस्टर करें
स्रोत: मुख्यमंत्री जन वन योजना , झारखण्ड सरकार
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