Confusion Surrounds Central Employees Awaiting 8th Pay Commission Recommendations
केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है, जो कि आने में लगभग डेढ़ साल का समय लगेगा। इस बीच, कर्मचारियों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं, विशेष रूप से नए साल 2026 की पहली छमाही में महंगाई भत्ते (डीए) की संभावित वृद्धि को लेकर। हाल ही में सरकार द्वारा जारी आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं के गायब होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है।
क्यों है कन्फ्यूजन?
दरअसल, 7वें वेतन आयोग का 10 वर्षीय साइकल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। उसके बाद अगला डीए या महंगाई राहत (डीआर) संशोधन पहली बार किसी सक्रिय वेतन आयोग साइकल के बाहर होगा। जबकि 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने में करीब 18 महीने लगेंगे। ऐसे में, केंद्रीय कर्मचारियों को तीन बार इस प्रकार की अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

आठवें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस में भी स्पष्टता नहीं है। सरकार द्वारा जारी ToR के बाद, नेशनल काउंसिल (NC-JCM) की स्टाफ साइड और कई कर्मचारी यूनियनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही अपनी मांगों का विस्तृत चार्टर सरकार को सौंपा था, किंतु ToR में उनके कई प्रमुख मुद्दों को अनदेखा किया गया है। इस स्थिति ने कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर दिया है, खासकर क्योंकि सरकार ने अब तक ToR से संबंधित मुद्दों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
संसद में संभावित स्पष्टीकरण
टर्म ऑफ रेफरेंस को लेकर कई सांसदों ने सरकार से सवाल उठाए हैं, जिससे कर्मचारियों को उम्मीद है कि 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद सत्र में कुछ स्पष्टता मिल सकती है। सरकार सदन में आगामी छमाही के डीए पर भी जानकारी दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी 2026, जुलाई 2026 और उसके बाद, जब तक 8वां वेतन आयोग लागू नहीं होता, तब तक मौजूदा 7वें वेतन आयोग की बेसिक सैलरी पर ही महंगाई भत्ते की गणना की जाएगी। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 58 प्रतिशत है, और मार्च 2026 में इसके 61-62 प्रतिशत होने की संभावना है।
इस प्रकार, केंद्रीय कर्मचारियों का ध्यान अब संसद के आगामी सत्र पर है, जहां उन्हें अपनी चिंताओं के समाधान की उम्मीद है।
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