8th Pay Commission Awaited 8वें वेतन आयोग का गठन प्रतीक्षित, कर्मचारियों की बढ़ती उम्मीदें
8वें वेतन आयोग के लागू होने की संभावित तारीख अब करीब है, केवल तीन महीने से भी कम समय बचा है। हालाँकि, सरकार ने अभी तक आयोग के औपचारिक गठन की घोषणा नहीं की है। परंपरागत रूप से, नए वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होती हैं, जिससे केंद्रीय सरकारी कर्मचारी इस समय सीमा के नजदीक बेसब्री से सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
कर्मचारी महंगाई और बढ़ती खर्चों के चलते 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं। उनकी मांग है कि आयोग का गठन जल्द से जल्द हो ताकि आवश्यक सिफारिशें समय पर लागू की जा सकें।

हालांकि, वर्तमान में केंद्र सरकार ने आयोग के गठन की दिशा में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है, जिससे कर्मचारियों में उत्सुकता और बढ़ गई है। यह स्थिति केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक चुनौती भी है, लेकिन साथ ही उनमें आगामी 8वें वेतन आयोग से जुड़े सकारात्मक बदलावों को लेकर उम्मीदें भी जीवित हैं।
इस प्रकार, कर्मचारियों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, और वे सरकार से तत्कालिक निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वेतन और भत्तों में संभावित बढ़ोतरी का लाभ उठा सकें।
क्या है डिटेल
NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग का फिटमेंट फैक्टर लगभग 1.96 तय किया जा सकता है, जिससे कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन लगभग दोगुना हो सकता है। भले ही 8वें वेतन आयोग का पूरा क्रियान्वयन वर्ष 2027 तक खिंच जाए, लेकिन इसके लाभ 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। इससे 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। नए वेतन ढांचे के लागू होने के बाद इन्हें एरियर (arrears) भी मिलेगा।
क्या है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जिसकी मदद से कर्मचारी के पुराने बेसिक वेतन को गुणा करके नया बेसिक वेतन तय किया जाता है। उदाहरण के तौर पर— 6वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन ₹7,000 था। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ, जिससे न्यूनतम वेतन बढ़कर ₹18,000 हो गया। अब 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर 1.92 से 2.86 के बीच रहने की संभावना है, जबकि 1.96 सबसे संभावित माना जा रहा है।
कितना बढ़ेगा वेतन?
अगर फिटमेंट फैक्टर 1.96 लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹35,280 हो जाएगा (लेवल-1 कर्मचारियों के लिए)। इसमें महंगाई भत्ता (DA) शामिल नहीं होगा, लेकिन मकान किराया भत्ता (HRA) शहर के हिसाब से जोड़ा जाएगा।
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