People of Malhia village, Uttar Pradesh, craving for housing आवास के लिए तरस रहे मलहिया गांव, उत्तर प्रदेश के लोग

People of Malhia village, Uttar Pradesh, craving for housing आवास के लिए तरस रहे मलहिया गांव, उत्तर प्रदेश के लोग 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर गरीब को पक्का घर देने के वादे को साकार करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री शहरी व ग्रामीण मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पात्रों को आवास दिए जा रहे हैं।
People of Malhia village

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर गरीब को पक्का घर देने के वादे को साकार करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री शहरी व ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पात्रों को आवास दिए जा रहे हैं। इसके विपरीत कुशीनगर जिले के खड्डा ब्लाक के मलहिया गांव के लोग आवास के लिए तरस रहे हैं। इसकी वजह शासन की ओर से तैयार कराई गई सेक डाटा बताई जा रही है। यहां के अधिकांश ग्रामीण झोपड़ी में गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। वर्ष 1971 में भीषण बाढ़ से नारायणी का मलहिया बांध कट गया। इससे नौतार जंगल, गेठिहवा, बुलहवां आदि गांव बह गए। जानमाल की भी काफी क्षति हुई और तीनों गांवों का अस्तित्व समाप्त हो गया।

वंचित रह गया मलहिया गांव

सरकार ने इन गांवों के लोगों को रेलवे लाइन के दक्षिण बोधीछपरा, मलहिया व रामपुर जंगल के मौजा में बसाया गया। बोधीछपरा व रामपुर जंगल तक विकास की किरण भी पहुंची, लेकिन मलहिया गांव वंचित रह गया। गांव में 533 परिवारों में करीब तीन हजार की आबादी रहती है। इनमें से अधिकांश परिवार भूमिहीन हैं। महिलाएं दूसरे के खेत में मजदूरी व पुरुष बालू खनन व पत्थर तोड़ने का कार्य करते हैं।

बनवाई गई थी बीपीएल सूची

केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2011 में सामाजिक आर्थिक गणना कराकर बीपीएल सूची बनवाई गई थी। झोपड़ी में निवास कर रहे परिवारों का सेक डाटा तैयार किया गया था। विभागीय लापरवाही के कारण मलहिया गांव का सेक डाटा शासन के पोर्टल पर शो नहीं कर रहा है। इस वजह से यहां का कोई परिवार बीपीएल सूची में शामिल नहीं हो सका और उन्हें आवास की सुविधा नहीं मिल पाती है।

क्‍या कहते हैं ग्रामीण

85 वर्षीय केदार मल्लाह कहते हैं कि भूमिहीन होने की वजह से कुनबा किसी तरह गुजर-बसर कर रहा है। मजदूरी ही जीवन का सहारा है। छोटेलाल चौहान ने कहा कि मजदूरी के सहारे बच्‍चों व माता-पिता की सेवा करना मुश्किल है। महंगाई के समय में पक्का घर कैसे बना सकते। जिम्मेदारों की गलती से सरकार आवास नहीं मिल रहा है। छांगुरी देवी ने कहा कि सरकार गरीबों को पक्का मकान दे रही है, लेकिन हमारे गांव में किसी को नहीं मिला है। नंदलाल ने कहा कि पिछले चुनाव में मलहिया गांव का प्रधान पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गया। उम्मीदवार न मिलने से प्रधान पद खाली रहा। अधिकारियों की उदासीनता से समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

अगली योजना में इस गांव को किया जाएगा शामिल

बीडीओ आनंद प्रकाश ने कहा कि आर्थिक सामाजिक गणना की सूची में मलहिया गांव का नाम नहीं होने के कारण वहां के लोगों को आवास की सुविधा नहीं दी जा सकी। आवास प्लस की सूची में भी यह गांव शामिल नहीं हो पाया है। अब अगली योजना में इसे शामिल कराया जाएगा।

Source: https://www.jagran.com

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