Allotment of Houses प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाईयू) के अंतर्गत आवंटित किए गए आवासों का ब्यौरा
भारत सरकार
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय

लोक सभा

अतारांकित प्रश्न सं० 2699
22 दिसम्बर, 2022 को उत्तर के लिए

आवासों का आवंटन

2699. श्री रतनसिंह मगनसिंह राठौड़:

क्या आवासन और शहरी कार्य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:

(क) विगत तीन वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाईयू) के अंतर्गत आवंटित किए गए आवासों का ब्यौरा क्‍या हे;
Allotment of Houses
(ख) उक्त योजना के अंतर्गत गुजरात को आवंटित की गयी निधि का ब्यौरा क्या है;

(ग) क्‍या सरकार की गुजरात में पीएमएवाई-यू के लिए धनराशि और बढाने की कोई योजना है; और

(घ) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?
उत्तर
आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री

(श्री कौशल किशोर)

(क) और (ख): आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय 'सबके लिए आवास' के विज़न के तहत, 25.06.2015 से सभी पात्र शहरी परिवारों/लाभाथियों के लिए आवासों के निर्माण द्वेतु केंद्रीय सहायता प्रदान करके प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रयासों को पूरा कर रहा है । पिछले तीन वर्षों और चालत्रू वर्ष के दौरान पूरे भारत में कुल 63.70 लाख आवासों को स्वीकृति दी गई है। अब तक पीएमएवाई-यू के तहत आवासों के निर्माण हेतु गुजरात राज्य के लिए केंद्रीय सहायता के रूप में अनुमोदित 21,933.54 करोड़ रू. में से 16,043.17 करोड़ रू. जारी किए गए हैं।

(ग)और (घ): केंद्र सरकार, पीएमएवाई-यू के लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत निर्माण या संवर्द्धन (बीएलसी) और साझेदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटकों के लिए 1.5 लाख रू. की केंद्रीय सहायता और स्व-स्थाने सलम पुनर्विकास (आईएसएसआर) घटक के तहत 1.0 लाख रू. की केंद्रीय सहायता के रूप में अपना निर्धारित हिस्सा प्रदान करती है। पीएमएवाई-यू घटक के ऋण संबद्ध सब्सित1ती स्कीम (सीएलएसएस) घटक के तहत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईाब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) श्रेणी के लाभार्थियों के लिए 6.5% की दर से ब्याज सब्सिगी प्रदान की गई थी, जो प्रति आवास 2.67 लाख रू. थी। आवास की शेष लागत राज्यों/संघ राजय क्षेत्रों/यूएलबी/लाभार्थियों द्वारा वहन की जाती है। किसी भी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के लिए पीएमएवाई-यू के तहत केंद्रीय सहायता की मात्रा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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