Press Information Bureau 
Government of India
Ministry of Water Resources
05-December-2018 17:22 IST

Nitin Gadkari expresses satisfaction on the progress of Clean Ganga Mission 
Significant changes to be visible on ground after March 2019 Kanpur freed from the ill effects of Sisamau Drain

Union Minister for Water Resources, River Development and Ganga Rejuvenation Shri Nitin Gadkari today expressed his satisfaction over the positive feedback being received for Clean Ganga Mission and assured the people of the country that their dream of rejuvenated Ganga will soon be fulfilled. He said that with the support of all stakeholders, the work on Clean Ganga Mission is going on war footing and the hard work of all stakeholders has started to show visible results on ground. “The government has freed Kanpur from the ill effects of Sisamau drain after 128 years, which was infamous for the pollution it was causing to River Ganga,” Gadkari said, adding, “140 MLD of waste water has been stopped from flowing into River Ganga.” Shri Gadkari was speaking at the three-day long India Water Impact Summit 2018 (5th to 7th December 2018) being organized at Vigyan Bhawan, New Delhi.
Six reports prepared by Ganga were released on the occasion regarding flow regimes and Ganga River Basin Management Plan of five main stem Ganga basin states. Green Ganga App, developed by Remote Sensing Centre of ISRO was also launched during the occasion. Green Ganga App is used for geo-tagging of saplings and delineation of plantation boundaries under ongoing afforestation activities of Namami Gange programme. The touch-enabled information kiosk about Namami Gange programme, developed jointly by NMCG and ISRO, was also launched.

Shri Gadkari said that since inception of Ganga cleaning programme (1985) till 2014, central government had spent less than Rs. 4000 crore. With the launch of Namami Gange programme, provision of Rs. 20,000 crore have been made for 5 years. So far, National Mission for Clean Ganga (NMCG) has sanctioned 254 projects for more than Rs 24,000 crore and has spent about Rs. 5,000 crore in the last 4 years. He said that not only has the pace of expenditure increased manifold, results are visible on the ground as well. “Out of these 254 projects, 133 are for sewerage management, 11 bioremediation, one modular STP, 1 rural sanitation, 64 ghat and crematoria, 6 bio-diversity and 16 afforestation projects,” Shri Gadkari informed the gathering. He added that 133 sewerage infrastructure projects costing Rs. 19,789 crore will create 3969 MLD of sewage treatment capacity and lay down 4871 kilometer of sewerage network.

Reiterating the focus on tributaries of Ganga, Shri Gadkari said that 26 projects are being taken up on tributaries like Yamuna, Saryu, Ram Ganga, Gomti, Kali, Kosi, Gandak, Damodar, Rispana-Bindal etc.

Shri Gadkari also mentioned that the Aviralta of River Ganga has also been given importance and to ensure that required level of ecological flow is always maintained, a notification has already been published in October. Following this a meeting has been held with all state Chief Secretaries asking them to implement the e flow notification. Shri Gadkari also talked about the success story of Hybrid Annuity mode (HAM) in sewage water sector and One-City-One-Operator for integrating the development of new STPs with the existing treatment infrastructure under HAM.

Minister of State for Housing and Urban Affairs Shri Hardeep Singh Puri complimented the Namami Gange programme for making Clean Ganga Mission a mass movement and said that all possible efforts required from his ministry is being provided in the form of three main works that include 
  • Making villages Open Defecation Free, 
  • Implementing Liquid Waste Treatment and 
  • Solid Waste Management. 
He said that under Namami Gange programme, 97 towns within 5 kilometers of River Ganga have been identified where interventions are being made. He further said that Swachh Bharat Mission is helping villages along Ganga to become ODF.

Minister of State for Water Resources, River Development and Ganga Rejuvenation Dr. Satya Pal Singh hoped that the Clean Ganga Mission will be immensely benefitted from the ideas which come during the three-day long summit and said that foreign collaboration is very important for the task of Ganga Rejuvenation. 

Linking the problem of Ganga Cleaning with over-extraction of groundwater, Secretary, Ministry of Water Resources, River Development and Ganga Rejuvenation Shri U.P. Singh said that there is an urgent need for paradigm shift in water resources management as it would help in maintaining the Aviralta of River Ganga. He expressed deep concern on the depleting levels of aquifers stopping the water flow back to the river. He stressed on the need to talk about issues of groundwater recharge, maintaining floodplains, rain water harvesting and restoration of water bodies.

During the inaugural session titled “Global Cooperation for a Global Issue” of the three-day summit, Hon. Water Minister of Ghana Ms. Cecilia Abena Dapaah, Ambassador of Israel, H.E Maya Kadosh, Ambassador of Slovenia H.E. Jozef Drofenik, Deputy Chief of Mission, Germany H.E. Jasper Wieck, World Bank Director Mr Steven N Schonberger addressed the gathering. 

पत्र सूचना कार्यालय 
भारत सरकार
जल संसाधन मंत्रालय 
05-दिसंबर-2018 18:29 IST

नितिन गडकरी ने स्वच्छ गंगा मिशन की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया 
मार्च, 2019 के बाद महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई पड़ेंगे सीसामऊ नाले के कुप्रभावों से कानपुर मुक्त हुआ

केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी ने स्वच्छ गंगा मिशन की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और देश के लोगों को आश्वस्त किया कि स्वच्छ गंगा का उनका सपना जल्द ही पूरा होगा। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों के समर्थन से स्वच्छ गंगा मिशन का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। सभी हितधारकों की कड़ी मेहनत के सुखद परिणाम दिखाई पड़ने लगे है। 128 सालों के बाद सरकार ने सीसामऊ नाले के कुप्रभावों से कानपुर शहर को मुक्त किया है। 140 एमएलडी प्रदूषित पानी को गंगा नदी में बहने से रोका गया है। श्री गडकरी विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित इंडिया वॉटर इम्पेक्ट समिट 2018 (5-7 दिसंबर, 2018) को संबोधित कर रहे थे।इस अवसर पर 6 रिपोर्टे जारी की गई, जो मुख्यतः गंगा नदी बेसिन प्रबंधन योजना से संबंधित हैं। इसरो द्वारा विकसित ग्रीन गंगा एप को भी लांच किया गया। नामामि गंगे कार्यक्रम के तहत वनीकरण गतिविधियों के जियो-टैगिंग के लिए इस एप का उपयोग किया जाएगा। नामामि गंगे कार्यक्रम के लिए सूचना कियोस्क को भी लांच किया गया इसे एनएमसीजी और इसरो ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
श्री गडकरी ने कहा कि गंगा सफाई कार्यक्रम (1985 से लेकर 2014 तक) के लिए केन्द्र सरकार ने 4000 करोड़ रुपये से भी कम व्यय किया था। नामामि गंगे कार्यक्रम के लिए पांच वर्षों के दौरान 20000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 24000 करोड़ रुपये मूल्य की 254 परियोजनाओं की स्वीकृति दी है और पिछले पांच वर्षों में 5000 करोड़ रुपये खर्च किए है। इन 254 परियोजनाओं में 133 सीवर प्रबंधन, 64 घाट और श्मशान घाट, 6 जैव विविधता और 16 वनीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 133 सीवर परियोजनाओं की लागत 19789 करोड़ रुपये है जिससे 3969 एमएलडी सीवर शोधन होगा तथा 4871 किलोमीटर लम्बा सीवर नेटवर्क निर्मित किया जाएगा।

श्री गडकरी ने कहा कि गंगा की सहायक नदियों पर विशेष ध्यान देते हुए 26 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई है। सहायक नदियों में यमुना, सरयू, रामगंगा, गोमती, काली, कोसी, गंडक, दामोदर आदि शामिल हैं। गंगा नदी की अविरलता पर ध्यान दिया गया है। पारिस्थितिकीय बहाव के आवश्यक स्तर को बनाए रखने के लिए अक्टूबर में एक अधिसूचना प्रकाशित की गई थी। इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक आयोजित की गई थी।

केन्द्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने नामामि गंगे कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इसे एक जनांदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए तीन प्रमुख कार्य है- 
  • गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाना, 
  • जल शोधन को लागू करना तथा 
  • ठोस कचरा प्रबंधन। 
उन्होंने कहा कि नामामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे में 97 शहरों की पहचान की गई है। स्वच्छ भारत मिशन गंगा तट पर स्थित गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने में मदद कर रहा है। 
केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री श्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में व्यक्त विचारों से स्वच्छ गंगा मिशन को बहुत लाभ होगा। गंगा को अविरल बनाने के लिए विदेशी सहयोग आवश्यक है।

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव श्री यू.पी. सिंह ने गंगा को स्वच्छ बनाने की समस्या को भू-जल के अत्याधिक दोहन से जोड़ते हुए कहा कि जल संसाधनों के प्रबंधन में बड़े बदलाव की जरूरत है। इससे गंगा नदी की अविरलता को बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने जल स्रोतों के कम होते जल स्तर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भू-जल रिचार्ज, वर्षा जल संचय, जलाशयों का पुनरुद्धार, बाढ़ के मैदानों को बनाए रखने पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। 

‘वैश्विक मुद्दें के लिए वैश्विक सहयोग’ के उद्घाटन सत्र को घाना की जल मंत्री सुश्री सेसिलिया अबेना दपाह, इजरायल की राजदूत माया कडोश, स्लोवेनिया के राजदूत श्री जोजेफ ड्रोफेनिक, जर्मनी के मिशन के उप-प्रमुख श्री जस्पर वियेक, विश्व बैंक के निदेशक श्री स्टीवेन एन स्कॉनबर्गर ने भी संबोधित किया।