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Monday, December 17, 2018

Patna on board the game-changing container cargo circuit on Inland Waterways पटना अंत:स्‍थलीय जलमार्ग के ऐतिहासिक कंटेनर कार्गो परिपथ में शामिल

Press Information Bureau 
Government of India
Ministry of Shipping
15-December-2018 13:33 IST
Bihar's capital Patna on board the game-changing container cargo circuit on Inland Waterways 

In a first for the city, IWAI vessel reached Gaighat terminal carrying container cargo from Kolkata along river Ganga Patna and upcoming IWAI terminal at Kalughat to emerge as new hub for trade up to Nepal with river Gandak announced as National Waterway 37 
 cargo+circuit+on+Inland
Patna witnessed a new landmark in India’s Inland Water Transport (IWT) sector with 16 TEUs of container cargo (equivalent to 16 truckloads) belonging to food giants PepsiCo India and Emami Agrotech Ltd from Kolkata reaching the city’s Gaighat IWT terminal on river Ganga late evening on Friday.

The 815 kms long voyage was a momentous one with the opening up of Kolkata-Patna as a new Origin-Destination pair on Inland Waterways.

Earlier, on November 12, 2018, Honble Prime Minister had received the country’s first IWT containerised cargo that reached Varanasi from Kolkata.

Plans are at an advanced stage to operationalise Patna-Varanasi sector of NW-1 for container cargo movement. Container cargo transport comes with several inherent advantages. Even as it reduces the handling cost, allows easier modal shift, reduces pilferages and damage, it also enables cargo owners to reduce their carbon footprints.

The Ministry of Shipping is developing NW-1 (River Ganga) under Jal Marg Vikas Project (JMVP) from Haldia to Varanasi (1390 Km) with the technical and financial assistance of the World Bank at an estimated cost of Rs 5369 crore. The project would enable commercial navigation of vessels with capacity of 1500-2,000 DWT.

The movement will give a fillip to the region’s growth and employment. According to the World Bank economic analysis, of the 1.5 lakh direct and indirect employment opportunities to be created due to interventions under JMVP, 50,000 will be in Bihar alone.

पत्र सूचना कार्यालय 
भारत सरकार
शिपिंग मंत्रालय 
15-दिसंबर-2018 15:23 IST

बिहार की राजधानी पटना अंत:स्‍थलीय जलमार्ग के ऐतिहासिक कंटेनर कार्गो परिपथ में शामिल 

पटना शहर में पहली बार आईडब्‍ल्‍यूएआई पोत गंगा नदी के जरिए कोलकाता से कंटेनर कार्गो लेकर गायघाट टर्मिनल तक पहुंचा
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पटना और कालूघाट में निर्मित होने वाला आगामी आईडब्‍ल्‍यूएआई टर्मिनल गंडक नदी के जरिए नेपाल के साथ व्‍यापार के एक नए हब के रूप में उभरेगा। इसे राष्‍ट्रीय जलमार्ग 37 घोषित किया गया 

पटना भारत के अंत:स्‍थलीय जल परिवहन (आईडब्‍ल्‍यूटी) क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना, जब कोलकाता से खाद्य क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों पेप्सिको इंडिया एवं इमामी एग्रोटेक लिमिटेड के कंटेनर कार्गो (16 ट्रक लोड के समतुल्‍य) के 16 टीईयू शुक्रवार की रात गंगा न‍दी में नगर के गायघाट आईडब्‍ल्‍यूटी टर्मिनल पर पहुंचे।

कोलकाता-पटना के अंत:स्‍थलीय जलमार्ग पर एक नए उद्भव-गंतव्‍य जोड़ी के रूप में खोले जाने के साथ 815 किलोमीटर की लंबी जलयात्रा एक ऐतिहासिक यात्रा थी।

इससे पूर्व, 12 नवंबर 2018 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश के पहले आईडब्‍ल्‍यूटी कंटेनरकृत कार्गो की अगुवानी की थी जो कोलकाता से वाराणसी पहुंचा था।

कंटेनर कार्गो आवाजाही के लिए एनडब्‍ल्‍यू-1 के पटना-वाराणसी सेक्‍टर को परिचालित करने की योजनाएं अग्रिम चरण में हैं। कंटेनर कार्गो परिवहन में कई अं‍दरूनी लाभ अं‍तर्निहित होते हैं। यह संचालन लागत में कमी लाता है, सरल मॉडल शिफ्ट की सुविधा प्रदान करता है, रिसाव और नुकसान कम करता है साथ ही कार्गो मालिकों को उनके कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाने में भी सक्षम बनाता है।

जहाजरानी मंत्रालय 5369 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत के साथ विश्‍व बैंक की तकनीकी एवं वित्‍तीय सहायता से हल्दिया से वाराणसी (1390 किलोमीटर) की जलमार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत एनडब्‍ल्‍यू-1 (गंगा नदी) का विकास कर रहा है। यह परियोजना 1500-2000 डीडब्‍ल्‍यूटी की क्षमता के साथ पोतों के वाणिज्यिक नौपरिवहन में सक्षम बनाएगा।

यह आवाजाही क्षेत्र के विकास एवं रोजगार को बढ़ावा देगी। विश्‍व बैंक आर्थिक विश्‍लेषण के अनुसार, जेएमवीपी के तहत इन उपायों के कारण लगभग 1.5 लाख प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रोजगारों का सृजन होगा, जिनमें से 50 हजार केवल बिहार में ही सृजित होंगे।

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